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Thursday, July 26, 2018

NA MANG SAKI BANSURI

     .....,,  ना मांग सकी बांसुरी ......,,
  

राधा की चाह थी कृष्ण को ही पाने को

   मीरा की भक्ति थी प्रेम गीत गाने की
          कृष्ण की ही धुन में जो रमी रही बावरी
  आपने लिए कुछ भी ना मांग सकी बांंसुरी .....।।

सब जानते हैं राधा मिल लेती थीं छुप-छुप के
       गा लेती थी मीरा विरह घुट-घुट के
पर अधरों से लगी लगी जो बांटती थी मधुरी
     आपने लिए कुछ भी न मांग सकी बांसुरी....।।

नयन बिन ही सुर ने कृष्ण को निहार लिया
       छंदों में बांध -बांध जी भर प्यार किया
श्याम जी सांवरिया और सुर बने सांवरी
       आपने लिए कुछ भी  न मांग सकी बांसुरी।।

रूक्मिणी की मांग भरी द्रौपदी को चीर दिया
       व्यथा  विकल पार्थ को रणभूमि में धीर दिया
निष्काम कर्म योगनी करती रही चाकरी
आपने लिए कुछ भी न मांग सकी बांसुरी।।

*आपने लिए कुछ भी न मांग सकी बांसुरी*

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