रश़्क हो जाएगा ...इश़्क हो जाएगा...
रास्ते ख़ामोश थे
और मंजिलें बेचैन
ख्वा़ब में हम ढूंढते थे..
अपने दिल का चैन
मील के पत्थर की आँखें
कब की थीं पथरा चुकींं
आस भी अब थी उदास
चाहत भी इसकी जा चुकी...
उम्मीद की पगडंडियों पर
ये कौन हैं जो चल पड़ा
तकदीर की बाहेंं मरोड़े
है सीना ताने यूं खड़ा...
जब टूट जाये हर आस तो
आवाज़ देकर देखना
गै़रत को अपने हौसले को
ललकार देकर देखना
एक इशारे पर वो तेरा
हर काम करके जायेगा
किस्मत को भी तेरे फ़ैसले से
रश़्क हो जाएगा..... इश़्क हो जाएगा ।।।
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